Saturday, July 4, 2020

कोरोना काल के वो चेहरे

कोरोना काल के वो चेहरे|


आया ये कैसा कोरोना
दिखा गया वो अपना रूप घिनौना

दिखा गया वो दुनिया के अलग चेहरे
दे गया दर्द वो कितनो को गहरे|

कुछ थे सतर्क जैसे चौकीदार
लगातार लगते रहे पहरे
कोरोना से डर कर घरों में ही रह रहे|

कुछ ऐसे भी थे जो थे अंधे और बेहरे
घूमेंगे ना डरेंगे कोरोना से हम बार बार वो कह रहे|

खुद तो हुए बीमार औरो को भी डूबा दिया बीच मझदार
ना जाने कितनो को बना दिया लाचार|

कुछ थे मजदूर जिनके पास ना थी मोटर कार
मगर जाना था अपने घर जो था मीलो पार|

चल पड़े सबको पे वो भूके प्यासे
ना जाने वो लाए वो हिम्मत कहा से|

थे कुछ सतर्क पर फिर भी कोरोना ने उन्हें घेरा
बिना गलती के भी छुपा रहे थे चेहरा
समाज ने भी उनको दिखाई तब आंखें
जब कहना चाहिए था आओ मिलकर दुख ये बांटे|

काश लगा लेते हम सब मिल कर वो पहरे
मास्क लगा कर छुपा लेते वो चेहरे
ना देखने पड़ते हमें फिर अपनों में वो बेगाने चेहरे|

Friday, February 14, 2020

खाई थी आपने वो जो कसम,
फौज में जो रखते कदम।

देश का ना गिरने दोगे अभिमान,
चाहे फिर क्यों ना निकले जान।

जब मना रहे थे लोग प्यार का त्योहार,
कुर्बान हुए हाथो से उनके जो थे गद्दार।

जान से ऊपर रखा था देश प्रेम
याद करते थे सरहद पर,उधर आती थी उसको हिचकी,
आंखें टक टक देख रही उसकी लेते हुए हल्की सी सिस्की
दीवार पर टंगा तुम्हारा वो फोटो फ्रेम।

आखिर में तुम्हारी कसम की ना हुई हार,
जब दुश्मन पर हमारी फौज ने किया भारी प्रहार।

उड़ा दिए उन सबके होश,
और जोर से पूछा हाउस द जोश।

हाथ जोड़ के करते है आपको नमन,
अमर होके भी देश को दे गए चैन और अमन।